अंदाज़ा नहीं था

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अंदाज़ा नहीं था”
यादों की पोटली में सुंदर स्मृतियाँ
हृदय में सजाकर खुशी से रहूँगी।
कभी गम को अपने नजदीक भी
फटनकने की मैं इजाजत न दूँगी।
हुआ कुछ उलट मेरी जिन्दगी में
खुशियों ने कहा खुश होने न दूँगी।
अंदाज़ा नहीं था कि ऐसा ही होगा
मैं भी इसी जिद्द पर अडिग रहूँगी।
दूरी उचित है ऐसे मित्रों से यारों
समय से सचेत मैं तो उनसे रहूँगी।

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