कविता- कोरोना भयभीत हुआ है!

कोरोना भयभीत हुआ है!
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कोरोना भयभीत हुआ है,हम सब की परहेजी से।
देखा कैसे फैल गया था, दुनियां भर में तेजी से।।
कुछ दिन हम सब बंद रहें, अपने घर के तहखानों में।
इस वायरस से जंग छिड़ी है, दुनियां के मैदानों में।।
सोशल डिस्टेसिंग अपनायें,चेहरे पर मास्क लगाना है।
रगड़ के साबुन हाथों पे, वायरस को दूर भगाना है।।
यमराज का दूत कोरोना, निहत्था बन अब हार रहा।
लोगों की जागरूकता से ही, दुम दबा कर भाग रहा।।
प्रकृति से धोखा का परिणाम,ये आफत आई है।
स्वार्थ की खातिर मानव ने,धरती मां को सताई है।।
चलो प्रकृति की अोर चलें ,फिर से हरियाली लायेगें।
कोरोना जैसे वायरस को,पल में मार भगायेगें।।
कवि
कवि-अमरेश कुमार
कुमार अमरेश
युवा कवि साहित्यकार सह शिक्षक
कस्टोली,मंसूरचक, बेगूसराय(बिहार)

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