कविता- शिक्षक हड़ताल से वापस होने वाले लोगो के लिए

चंद पंक्तियां समर्पित हैं, सभी लोग भी पढ़े।

हड़ताल, अभी भी जारी है।

ऐसी क्या विपदा आन पड़ी जो
कुलघाती बनना स्वीकार किया
चंद हरे नोटों की खातिर
अपना मतलब साकार किया।

कुछ बंधु काल के ग्रास बने
कई पहर कहीं चूल्हे ना जले
सोचो उन मासूमों को
क्या हमसे अब सम्मान मिला।

याद करो उन संघर्षों को
जो पहले भी फलीभूत हुईं
90 दिनों का धैर्य हीं आखिर
उनकी खुशियों का सूत्र हुईं।

अब नियोजितों की बारी है,
उम्मीद अभी ना हारी है,
सुनो! सत्ता के शागीर्दों
हड़ताल, अभी भी जारी है।।
हड़ताल, अभी भी जारी है।।

🔴……..🖊️मुकेश गुप्ता🔴

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