कुपित बादल

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गीत☂️☔🌧️🌨️🌩️
बादल की गोद में कितना है पानी
ऐसे करे क्यूँ रे ये मनमानी।
ताल भरे सब पोखर उमड़े
नदियाँ की चढ़ती अपनी जवानी,
ऐसे करे क्यूँ रे ये मनमानी।
बादल की गोद में कितना है पानी।
पँछी रोवे हैं रोवे है गैया
आँचल में छुपा कर रोवे है मैया
करेगा ये बैरी क्या-क्या नादानी
ऐसे करे क्यूँ रे ये मनमानी,
बादल की गोद में कितना है पानी।
धान भी डूब गए खेत खलिहानी
छान छप्पर ढहे और ठिकाने
कैसे करेगा किसान किसानी,
ऐसे करे क्यूँ रे ये मनमानी
बादल की गोद में कितना है पानी,
कुपित भये तुम क्यूँ जन-जन पर
लाकर मानेगा तू सबपर सुनामी,
ऐसे करे क्यूँ रे ये मनमानी
बादल की गोद में कितना है पानी।

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