बार-बार

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  • दिल को बार बार समझाऊं
    नहीं कोई ऐसा मित्र है यहाँ।
    जो बिन बोले ही हृदय का
    दर्द समझ जाता है यहाँ।
    दर्द बताने पर जो तेरा
    तुझसे हाल पूछने आता हो
    वह साथी हो सकता है
    मित्र नहीं कहलाता वह।
    दिल को बार बार समझाऊं,
    नहीं कोई ऐसा मित्र है यहाँ।
    मौत सामने दिखता जब हो
    फिर तेरे साथ खड़ा हो,
    महाभारत में ऐसे मित्र कर्ण ने
    मित्रता के लिए जो लड़ा हो।
    दिल को बार बार समझाऊं
    नहीं कोई ऐसा मित्र है यहाँ।
    मुट्ठी भर चावल के बदले
    बिन मांगे सर्वस्व दिया हो
    कृष्ण सुदामा से बड़ा कौन
    मित्र इस दुनिया में भला हो।
    दिल को बार बार समझाऊं,
    नहीं कोई ऐसा मित्र है यहाँ।
    कहने को सब ही मित्र हैं बनते
    अपना स्वार्थ सिद्ध करने को।
    हो जाये जब पूर्ण काज तो
    रहते तैयार राह बदल चलने को।
    दिल को बार बार समझाऊं,
    नहीं कोई ऐसा मित्र है यहाँ।
    कहते मेरे पास वक़्त नहीं है,
    मैं व्यस्त हूँ अपने सुखी जीवन में,
    बहुत हुआ अब कभी नहीं!
    तेरे लिए मैं अपना कीमती,
    वक़्त अपना बर्बाद नहीं करूंगा!
    क्या मिलेगा अब तुझसे जो,
    तेरे लिए मैं इतना कुछ सहूँगा!
    दिल को बार बार समझाऊं,
    नहीं कोई ऐसा मित्र है यहाँ।

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