बिहार सरकार के नज़र में नियोजित शिक्षकों का मोल?! आखिर क्यों हो रहा शिक्षकों पर अत्याचार!

बिहार सरकार के उदासीन रवैया से शिक्षक हैं परेशान।

नियोजित शिक्षकों की कीमत अब शायद भेड़- बकरियों से ज्यादा नहीं रह गई है हो सकता मेरी ये बातें अटपटा लगे लेकिन ये सत्य है कि बिहार में शिक्षकों की कीमत अब शायद नही रह गई है। ना ही सरकार के नजर में और ना ही जनता की नजर में…!

हर तरफ शिक्षक को एक निरीह प्राणी के रूप में देखा जाता है क्योंकि शिक्षा विभाग के सबसे निचले पायदान पर शिक्षक ही होते हैं। जिसपर जो चाहे अपना रॉब जमा देते है। अपनी कमी का ठिकड़ा भी शिक्षकों पर ही फोड़ दिया जाता है।

यहाँ तक कि मुख्यमंत्री जी भी कई बार शिक्षकों के बारे में ऐसे ऐसे बयान दे देते है जो किसी से छुपा नहीं है। हो सकता है यह मेरी बातें आप लोगों को बुरी लगे लेकिन यही सत्य है। मेरी पूरी बात को समझने के लिए इस वीडियो को जरूर देखें।👇

एक तरफ बिहार में आज एक भी काम शिक्षक के बिना संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में आज एक कोरोना महामारी में सरकार न लगाएं संभव ही नहीं है लेकिन रोना इस बात का है कि जिस महामारी से सभी डर कर घरों में बैठे हैं वहीं बिना सुरक्षा किट के ही क्वारन्टीन सेन्टर पर ड्यूटी में तैनात कर दिया गया है।

भारत सरकार के गाइड लाइन के अनुसार स्वास्थ्य और अन्य सभी कोरोना योद्धाओं को 50,00,000 की इंसुरेंस कवर दी जा रही है।

वही शिक्षकों को कोई इंश्योरेंस मुहैया नहीं कराया गया है और न ही शिक्षा विभाग इस हेतु कोई प्रयास कर रहा है। इसका मतलब साफ है सरकार चाहती है कि 50 लाख का काम 4 लाख में ही निपट जाए तो क्या दिक्कत है? जबकि अन्य विभाग अपने कर्मचारियों की चिंता करते हुए स्वास्थ्य विभाग से 50 लाख के इन्सुरेंस की मांग की है।

लेकिन शिक्षा विभाग चिर निद्रा में सोई हुई है। जबकि बिहार के शिक्षक संगठन इसके लिए लगातार माँग कर रहे हैं।

अब आते है मुख्य मुद्दे पर…. वहीं विभिन्न जिलों क्वारन्टीन सेंट्ररों पर शिक्षकों के साथ मारपीट की घटनाएं आम हो रही है।

आप सभी को बता दें कि कोरोना सेंटर पर कोई भी सुविधा मुहैया करने का काम जिम्मा अंचलाधिकारी और मुखिया को को है शिक्षक को सिर्फ देख रेख के लिए लगाया गया है। ऐसे में वे सारी सुविधाएं शिक्षकों से ही खोज रहे हैं जिसके वजह से बात बढ़ने मारपीट तक की घटना हो जा रही है कुछ तस्वीरें और खबरों के स्क्रीनशॉट यहां पर आप देख सकते हैं कि किस तरीके से शिक्षकों को मारा पीटा जा रहा है।शिक्षकों को जान से मारने का प्रयास किया जा रहा है फिर भी सरकार के द्वारा कोई भी सुरक्षा मुहैया नहीं कराया जा रहा है ऐसे में अगर मैं कहूं कि शिक्षक की कीमत भेड़ बकरी से ज्यादा नहीं है तो गलत नहीं होगा। आज एक आम इंसान भी किसी घटना से मरता है तो चार लाख की राशि अनुग्रह राशि के रूप में दिया जाता है और बिहार के सारी योजनाओं को फलीभूत करने वाले शिक्षक के मरने पर भी चार लाख से ज्यादा एक फूटी कौड़ी नहीं मिलने वाली। शिक्षक के मरने के साथ ही सारी कहानी खत्म हो जाती है।

अब ऐसे में आप सोच सकते हैं कि कोरोना जैसे महामारी से जुझने के लिए ना तो कोई सुरक्षा किट का व्यवस्था किया जा रहा है और ना ही सुरक्षा मुहैया कराया जा रहा है ऐसे में शिक्षकों और उसके परिवार की स्थिति क्या होगी?? सोचने वाली बात है!

आप समझ सकते हैं स्थिति ऐसी हो चुकी है कि शिक्षक घर से बाहर निकलते तो है लेकिन वापस घर मे सकुशल आयेंगे या उनके साथ अनहोनी हो जायेगा कोई नहीं जानता। क्वारन्टीन होने आये लोगों के द्वारा मार दिया जाएगा अथवा कोरोना से ही पीड़ित होकर हो जाएंगे ये कोई नहीं जानता। लेकिन बिहार सरकार इसकी कोई सुध लेने वाला नहीं है।

ये सारी बातें जब हमने देखा तो इस संबंध में हमने शिक्षक संगठनों के विभिन्न पदाधिकारियों से बातचीत की और उनसे इस संबंध में जानकारी ली ऐसे में मुझे पता चला कि परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ के प्रदेश संगठन महामंत्री शिशिर कुमार पांडे और प्रदेश कार्यकारी संयोजक नवनीत कुमार मिश्रा ने जानकारी दी कि उन्होंने बिहार के डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को इस संबंध में जानकारी दी गई है। साथ ही साथ सुरक्षा मुहैया उपलब्ध कराने के लिए भी गुहार लगाई गई है। इसी क्रम में टेट शिक्षक संघ बीएमएस के प्रदेश महासचिव आचार्य रवि ने अपनी बातों को हमसे साझा किए और उन्होंने जो कुछ भी बताया वह काफी दुःखद था।

बिहार सरकार को और बिहार सरकार के आला अधिकारी को खासकर के शिक्षा विभाग के अधिकारियों को इस पर संज्ञान लेना चाहिए और अपने शिक्षकों की सुरक्षा के लिए इंतजाम किया जाना चाहिए वही परिवर्तनकारी शिक्षक महासंघ के प्रदेश प्रधान सचिव जमील अहमद विद्रोही ने बताया के बिहार में स्थिति बहुत ही गंभीर है सूचना मिली है कि विभिन्न जिलों में क्वॉरेंटाइन सेंटर पर शिक्षकों के साथ मारपीट की घटनाएं हो रही हैं यह काफी दुःखद है।जमील अहमद विद्रोही जी का बयान सुनने के लिए यहां क्लिक करें।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here