रहने दो

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चारो तरफ़ आज मौसम में नमी ही नमी छाई है,
कलियों को खिलने दो हवा में खुमार रहने दो।

लोग मिलते हैं अब यहाँ अपने मतलब के लिए,
कम-से-कम इन मासूम परिंदों में प्यार रहने दो।

  1. हटाये हैं पर्दे जो चेहरों पर पड़े थे कई रंग लिए,
    भ्रम में ही सही प्यार सब में बेसुमार रहने दो।

कत्ल कर-कर के कई लोग बनते रहे रक़ीब यहाँ,
तुम भी उनमें रकीबत का भ्रम पलते रहने दो।

हर कली भी शर्मिंदा है मनचले से इन भंवरों पर,
वही रखवाले हैं कलियों के ऐसे भ्रम में रहने दो।

बहार आती है, पतझड़ के बाद फिर भी आएगी,
मौसमी बादल हैं कुछ दिन के लिए बरसते रहने दो।

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