कविता

रहना तैयार,,, आ रहे हैं हम शिक्षक *~*~*~*~*~*~*~*~*~*~* 05 सितंबर को गांधी मैदान, देख दुनियां हो जाएगा हैरान, देखना शिक्षक मौन रहेंगे, काली पट्टी मुँह पर बांध रहेंगे। 'समीर' की इस...

मतलब परास्त

ये जो दुनिया है मतलब परस्तों की देखी है न आपने कई रंग चेहरे की। एक ऊपर से मासूम, चादर है नेकी की फुरसर में जब होते याद करते हैं ऐसे जिन्हें...

अंदाज़ा नहीं था

"अंदाज़ा नहीं था" यादों की पोटली में सुंदर स्मृतियाँ हृदय में सजाकर खुशी से रहूँगी। कभी गम को अपने नजदीक भी फटनकने की मैं इजाजत न दूँगी। हुआ कुछ...

कविता–शिक्षक राष्ट्र निर्माता है।

*शिक्षक राष्ट्र निर्माता है* *कर्जा लेकर खाता है* *पटना की धरती पर जाता है* *समान काम समान दाम* *की मांग रखता है* *हमसब के लिये लाठी घुसा...

डरता क्यूं है!

मेहनत कर तू डरता क्युं है। संघर्ष करने से बचता क्युं है॥ जान लगा दे या जाने दे। बीच भवंर में फंसता क्युं है ॥ समय अनमोल है...

मुझसे क्या पूछते हो

मुझसे क्या पूछते हो चलो आज कुछ अनकही खुद को आईने के सामने रख आँखों में आँखें डाल पूछ लो हर सवाल का जवाब खुद से ही.... मुझसे क्या...
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अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं।

अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं। अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं। अकेले हम कागज हैं, मिल जाए तो किताब हैं। अकेले हम अलफ़ाज़...

चार लाख नियोजित शिक्षकों एवं पुस्कालयाध्यक्षों पर हुए अन्याय के विरूद्ध बोलती हुई एक...

मातम सा क्यूँ है,आज मेरे विद्यालय में। _मेरे अरमानों का कत्ल तो हुआ है, सर्वोच्च न्यायालय में।।_ _अगर मांग लेते मेरे सरकार, तो दिल निकाल के...

देश के सेना को समर्पित,,

रो रहा आसमान, रो रही धरती, रो रहा पिता, रो रही मां भारती। रो रहा हर भाई, रो रहा हर दोस्ती, रो रही हर बहना, रो...

मेरी कविताएं- संजीव समीर

और...... हमने सीख लिया!   आओ.... करें! प्रकृति का गुणगान....   नजरिया