कविता रचनाएँ

शिक्षक की जाति

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शिक्षक की जाति
=====4 जनवरी 2019===
जाति में बाँटा शिक्षक को भी,
जाति देख वेतन भुगतान|
दु:शासन के राज का देखो,
जारी हुआ नया फ़रमान|
पहले से ही दो मद वाली,
रकम करे हमको हलकान|
कुछ बिहार सरकार से पाते,
कुछ का सर्व शिक्षा अभियान|
अब यह नया नियम है लागू,
जाति बनी शिक्षक पहचान|
इससे अच्छा बंद करो अब,
विद्यालय में शिक्षा दान|
नहीं जाति होती शिक्षक की,
नीति तुम्हारी ब्रिटिश समान|
शिक्षक बच्चों को सिखलाते,
सारे मानव एक समान|
शर्म करो दु:शासन थोड़ी,
नहीं उचित इतना अभिमान|
ढलेगा निश्चित तेरे मद का,
तपने वाला यह दिनमान|
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:- ओम प्रकाश ‘ओम’
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