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कविता-बिहार में बहार बा!

 

*(*(* बिहार में बहार बा! *)*)*
✒️रचना:- Sanjeev Sameer

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
शिक्षक के मान सम्मान के न परवाह बा,
शिक्षक से ज्यादा चपरासी के पगार बा।

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
केकरो के आंदोलन के न अब फिकर बा,
लाठी-गोली चलावे के मिलल लाइसेंस बा।

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
ई कइसन, जबरदस्ती का सम्मान बा?
न ली सम्मान तो करवाई के डंडा तैयार बा।

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
पहिला बार देखली जबरदस्ती सम्मान बा,
लेकिन,पटना की धरती पर रोत रहे सम्मान बा।

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
कहत बारे शराब और गुटका बन्द बा,
लेकिन, होम डिलीवरी खुबे होत बा।

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
सुशासन के डंका रोजे बजत बा,
लेकिन, डंके की चोट पर बैंक लूटात बा।

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
भ्रष्टाचार रोके के खाली हवा बा,
लेकिन, जगहे-जगह भ्रष्टाचार व्याप्त बा।

बिहार में बहार बा,
कुर्सी पर घमंड कुमार बा।
2020 में बदलाव के समीर बहल बा,
सुधार करीं, न त लोग भूल जाइ,
अभी केकर सरकार बा!

धन्यवाद
आपका
मौर्यवंशी संजीव समीर

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