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BSTA महासचिव ने कहा – अपर मुख्य सचिव जी एक बार फिर से नियोजन नियमावली की धारा-12 को पढ़ लें। नियम को ताख पर न रखें।

पटना, दिनांक 25 अप्रैल 2020

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदार नाथ पाण्डेय सदस्य बिहार विधान परिषद् एवं महासचिव, शत्रुघ्न प्रसाद सिंह, पूर्व सांसद ने एक संयुक्त बयान में कहा है कि अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग का शिक्षकों की एकता, संघीय निष्ठा और अपनी औचित्यपूर्ण मागों की प्रतिबद्धता पर शायद अंतिम प्रहार है। बिहार में जारी नियोजित शिक्षकों की हड़ताल को लेकर नीतीश सरकार में कल उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की थी. शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के डीईओ और डीपीओ से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हड़ताल की स्थिति पर फीडबैक लिया था. उसके बाद सरकार ने नियोजित शिक्षकों को काम पर वापस आने के लिए वेलकम कॉरिडोर का विकल्प दिया गया था लेकिन सरकार की शर्तों पर नियोजित शिक्षकों ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है.

पराजय की पस्तहिम्मति से बौखलाहट में तमाम कानून कायदे को ताख पर रखकर सेवा से बर्खास्तगी तक की अमानवीय धमकी दी गयी है। इससे शिक्षकों का आन्दोलन और भी मजबूत होगा। उनके हौसले की आफजाई होगी।

उन्होंने कहा है कि नीतीश सरकार शर्म घोलकर पी गई है. सुप्रीम कोर्ट में समान काम समान वेतन के मुद्दे पर न्यायायिक लड़ाई के दौरान कोर्ट ने यह टिप्पणी की थी कि बिहार में शिक्षकों का वेतन चपरासी से भी कम है, लेकिन उसके बाद भी सरकार समान वेतनमान के मुद्दे को वाजिब नहीं मान रही है। शतुघ्न प्रसाद सिंह ने कहा है कि यह सरकार की हिटलर शाही का परिणाम है कि बिहार में नियोजित शिक्षक लगातार हड़ताल पर है और उनमें से कईयों की मौत हो चुकी है.

लगभग 60 बेगुनाह शिक्षकों की शहादत बेकार नहीं होने देंगे। अभी-अभी सूचना मिली है कि कन्या इंटर विद्यालय, दाउदनगर औरंगाबाद में कार्यरत शिक्षक पित्रोस तिर्की का दुखद निधन हुआ है। जिला संघ के राज्य कार्यकारिणी के सदस्य सुरेन्द्र कुमार एवं जिला सचिव मनीष कुमार ने बीमारी की हालत में आर्थिक सहायता पहुचाई है क्योंकि उनके आवास में खाद्यान्न का एक दाना भी नहीं था, इसीलिए इस मौत का जवाबदेह नीतीश सरकार है।

बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ की मांग है कि सरकार उनके परिवार के पूर्ण भरण-पोषण की व्यवस्था सुनिश्चित करे और यह तमाम ऐसे दिवंगत शिक्षकों के लिए लागू किया जाय। अपर मुख्य सचिव जी एक बार फिर से नियोजन नियमावली की धारा-12 को पढ़े. जिसमें छुट्टी वाले उपबंध के क्रम में तीन माह से अधिक बिना सूचना की अनुपस्थिति के लिए विभिन्न निकायों को दंड देने का अधिकार प्रदत्त है। इसमें सरकार का हस्तक्षेप सर्वथा अवक्षनीय है। अतः पूर्व से सूचना देकर ही सरकार द्वारा वार्ता नहीं करने पर हड़ताल के लिए सरकार ने ही शिक्षकों को बाध्य किया।

अतः ऐसी परिस्थिति में अपर मुख्य सचिव का निदेश/आदेश पूर्णतः अवैधानिक है। इसका किसी भी कीमत पर शिक्षक अनुपालन नहीं करेंगे। बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ बार-बार यह संकल्प दुहराता है कि भारतीय संविधान लोक मर्यादा शिष्टता की रक्षा के लिए सरकार शिक्षक को शत्रु नहीं समझ कर उन्हें मानवीय गरिमा के साथ ससम्मान सारी मांगों की मंजूरी कर इस विश्वव्यापी कोरोना संकट में मानवता की सेवा कर रहे लाखों शिक्षकों के महान काम में सरकार बाधा नहीं डाले। उनका यह कठोर निर्णय लागू नहीं होगा।

शिक्षक लॉकडाउन तोड़कर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी अथवा जिला शिक्षा पदाधिकारी के यहाँ योगदान की सूचना नहीं देंगे, नही तो वे लॉकडाउन के उल्लंघन के अपराधी होंगे। एक बार फिर हम स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि शिक्षा विभाग मानवता के व्यापक हित में दमनात्मक कार्रवाई की वापसी, पढ़ाई की क्षतिपूर्ति की शर्त पर हडताल अवधि का वेतन, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की तर्ज पर पंचायती राज से सेवा का संविलियन, मुख्यमंत्री की घोषणा की मर्यादा की रक्षा के लिए विसंगतियां दूर करते हुए सातवें वेतनमान के लेवल-7 एवं लेवल-8 का वेतनमान शीघ्र स्वीकृत करे। कल की समीक्षा बैठक में यह प्रमाणित हो गया कि सरकार की प्रताड़ना के बावजूद 90 प्रतिशत से अधिक शिक्षक बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के आह्वान पर हड़ताल पर डटे हुए हैं और वे सरकार द्वारा घोषित तालाबंदी के नियम का पालन करते हुए दैहिक दूरी बनाने एवं कोरोना संकट से जंग के लिए आम-अवाम को प्रेरित कर रहे हैं। इस महान काम में जो बाधा पहुंचायेगा वह महापाप का भागी होगा। अनिश्चितकालीन हड़ताल 61 वां दिन भी जारी है।

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