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नीतीश कुमार जी ये असली बिहार की तश्वीर है. ये गुदड़ी के लाल भी नियोजित शिक्षक की देन है

यह जो तस्वीर आपलोग देख रहे हैं न यह असली बिहार की तस्वीर है।मैट्रिक टॉपर के परिवार की तस्वीर है।यही असली प्रतिभा है, क्योंकि प्रतिभा किसी की बपौती नही, मैट्रिक में पढ़ रहे बच्चों और उनके अभिभावकों आंखे चौड़ी करके देख लो, ज्ञान दौलत की गुलाम नही होती।आज इस गमछा धारी परिवार और यह बच्चा साबित कर दिया कि भाग्य कर्म के अधीन होता है।

इसको देख कर कौन कह सकता था कि यह बच्चा 2020 का मैट्रिक टॉपर बन जायेगा ? कल तक तो हम यह देखते आये थे कि शहरों के बच्चे टॉप कर रहे हैं, पर एक दो सालों से जिस तरह सुदूर गांवों के विद्यार्थियों ने अपनी योग्यता साबित की है उससे लगता है कि शहर में जाकर होशियार होने की बात गलत हो गयी है।

निश्चित रूप से यह लड़का उस सुविधाविहीन सरकारी स्कूल का छात्र होगा जहां नीतीश कुमार के नियोजित शिक्षक पढ़ाते होंगे हो सकता है यह पास के बाजार पर ट्यूशन भी करने जाता होगा।लेकिन यह नियोजित मास्टर और इसके अन्य मार्गदर्शक भी बधाई के पात्र है।शहर वालों तुमसे ब्रिलियंट होने का तमगा यह गांव वाले बच्चे छीन रहे हैं।

नीतीश कुमार थोड़ा सा और प्रयास कीजिए, इन वंचित वर्ग के बच्चों को पढ़ाने वाले योग्य शिक्षकों को उनका हक देकर देखिए रिजल्ट और भी बेहतर होंगे। बिहार बदला बदल नज़र आएगा। वर्ष 2020 का बिहार मैट्रिक स्टेट टॉपर हिमांशु राज ने साबित कर दिया कि परिवार की आर्थिक स्थिति पढ़ाई में कभी भी बाधक नही होती…..ये पहले भी सिद्ध हुआ है और आज भी।

हमलोग हमारे देश के भूतपूर्व प्रधानमंत्री स्व0 लाल बहादुर शास्त्री जी की जीवनी को भी पढ़ते हैं कि उनके पास नाव का किराया देने के लिए पैसा नही होता था तो वो अपने पीठ पर अपनी किताबों को बांध कर गंगा नदी को तैरते हुए पर कर ,पढ़ने के लिए जाते थे….या सड़क पर लगी हुई लाइट के नीचे अपना पढ़ाई पूरी करते थे…. इसी को देखते हुए उन्ही गुदरी का लाल की उपाधि दी गई थी।
जीवन की कठिन संघर्ष ने ही उस दिन शास्त्री जी को विलक्षण प्रतिभा का धनी बनाते हुए एक सामान्य से शास्त्री जी को असामान्य शास्त्री जी का रूप दिया वरना उस समय भी न जाने कितने शास्त्री जी हुए होंगे पर हमारी मेहनत , संघर्ष ही हमे सबसे अलग और अनोखा बनाता है।
अंततः उपरोक्त सभी बातों का एक ही निष्कर्ष है कि आज के परिवेश में भले ही हम अपने बच्चो को सारी सुख सुविधा उपलब्ध कराए , पर न जाने क्यों इतिहास या वर्तमान , दोनों ही समय का यदि हम आकलन करें तो एक ही परिणाम सामने आता है कि –
गुदरी के लाल जो कमाल कर पाते है वो महलों के लाल नहीं कर पाते।

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जो भी हो पर सत्य तो सत्य ही होता है………….

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